बीएसएनएल कर्मचारियों ने की हड़ताल

गाजियाबाद (करंट क्राइम)। देश भर में बीएसएनएल के कर्मचारी दो दिन से हड़ताल पर रहकर अपना विरोध जाहिर कर रहे है। गाजियाबाद में भी आज हड़ताल का मिला जुला असर देखने को मिला। यहां कर्मचारियों ने पूरी तरीके से काम को ठप्प रखकर अपनी नाराजगी जाहिर की। इसके अलावा केन्द्र सरकार पर अंदरखाने मुकेश अंबानी की कंपनी जिओ को सपोर्ट करने का आरोप लगाया। इसके अलावा केन्द्र सरकार को चेतावनी देते हुए स्पष्ट किया है कि अगर मांगो को जल्द से जल्द पूरा नहीं किया गया तो हड़ताल को अनिश्चकाल में तब्दील किया जा सकता है।
दरअसल केन्द्र सरकार बीएसएनएल के टावरों के मेटीनेंस के काम को देखते हुए इन्हे प्राईवेट कंपनी को दिए जाने की पैरवी कर रही है। बीएसएनएल और एमटीएनल के कर्मचारी इसका विरोध कर रहे है। इसके चलते कश्मीर से लेकर गाजियाबाद और तमाम दूसरे जनपदों में हड़ताल करके विरोध किया जा रहा है। गाजियाबाद में 569 कर्मचारी और 97 अधिकारी इस हड़ताल के समर्थन में काम से विरत है। बीएसएनएल की हड़ताल को इसके ही जुडे संगठन संचान निगम इंजीनियिरिंग एसोसिएशन, एसएनईए, नेशनल फेडरेशन टेलीकाम एम्पलाईज एनएफटीई ने भी समर्थन दिया है।
बीएसएनएल एम्पलाईज यूनियन के प्रदेश सचिव उपेन्द्र सिंह तेवतिया ने बताया कि हड़ताल के लिए तीन प्रमुख मांगे रखी गई है। इसमें तीसरे पेय रीविजन के सेटलमेंटए 15 प्रतिशत की दर से भुगतान, सब्सिडरी टावर कंपनी का विरोध किए जाना शामिल है। टावर कंपनी को हर मेटीनेंस की जिम्मेदारी दी जाएगी तो वहां लगे बीएसएनएल ईम्पलाईज को धीरे धीरे हटा दिया जाएगा। इस तरीके से धीरे धीरे बीएसएनएल को प्राईवेट हाथों में या फिर बंद किए जाने की साजिश रची जा रही है।
वेस्ट यूपी के बीएसएनएल एम्पलाईज यूनियन के सचिव का दावा है कि देश के पीएम और केन्द्र सरकार मुकेश अंबानी की कंपनी जिओ को अंदरखाने सपोर्ट कर रहे है। उसकी लांचिंग के मौके पर भी वो पहुंचे थे जबकि बीएसएनएल के लिए कोई मंत्री आने के लिए तैयार नहीं है। पहले टावर के नाम पर भी अन्य जरियों से बीएसएनल को कमजोर किया जा रहा है। टेलीकाम के मामले में बीएसएनएल को मोबाईल का काम छह साल बाद मिला। जबकि कांग्रेस के टाइम में टेलीकॉम एम्पलाइज को रीविजन सेटलमेंट मिला था।

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