67 वर्षों से मोहन की रबड़ी चॉकलेट से आ रहा है मुंह में पानी

वेदांश वशिष्ठ (करंट क्राइम)
गाजियाबाद। दिल्ली के यूपी गेट से शुरू होकर डासना टोल तक फैला गाजियाबाद शहर कभी चार गेटों में सीमित हुआ करता था। 14 नवंबर 1976 को जिला बनने से पहले भी इस शहर की रौनक अपने आप में मिसाल हुआ करती थी। शहर का दिल कहे जाने वाले चौपला क्षेत्र से राजनीति और कारोबार की शुरूआत हुआ करती थी। शहर के पुराने स्वरूप का ताजा करंट आज भी पुराने शहर में मौजूद है। करंट क्राइम के नए कॉलम पुराने शहर का ताजा करंट में आज हम अपने पाठकों को उस दुकान पर ले चल रहे हैं जहां इतिहास के पन्ने इस बात की गवाही है कि शहर ने किस तरह स्वरूप बदला है। अनाज मंडी स्थित मोहन रबड़ी फलूदा वालों की दुकान पर आज तीसरी पीढ़ी कारोबार कर रही है। 8 आने का रबड़ी फलूदा क ा गिलास इसी दुकान पर बिका करता था। 67 साल पहले खुली यह दुकान आज भी अपनी रबड़ी फलूदा और चॉकलेट के लिए मशहूर है।

गाजियाबाद (करंट क्राइम)। पुराने शहर के ताजा करंट में आज हम आपको बताएंगे शहर के सबसे पुराने और मशहूर मोहन रबड़ी फलूदा वाले की कहानी। यह रबड़ी फलूदा केवल गाजियाबाद जिले में ही नहीं बल्कि आसपास के कई जिलों में फैमस है। मोहन रबड़ी फलूदा और चॉकलेट इस शहर के हर व्यक्ति की पसंद है। सन् 1950 से गाजियाबाद में रबड़ी फलूदा और चॉकलेट का कारोबार करने वाले अशोक खेड़ा बताते हैं कि यह कारोबार उनके पिता श्री मोहन लाल खेड़ा ने पाकिस्तान के लायलपुर मंडी से गाजियाबाद आकर शुरू किया था। शुरूआत में शम्भुदयाल डिग्री कॉलेज के सामने रेहड़ी पर 8 आने का फलूदा बेचना शुरू किया और आज यह फलूदा गाजियाबाद की पहचान बन चुका है। मोहन रबड़ी फलूदा अब घंटाघर स्थित नई बस्ती के कोने पर स्थापित है। अशोक खेड़ा ने बताया कि कारोबार में सफलता मिलने के बाद उन्होंने 1985 में अनाज मंडी में अपनी दुकान खोली। मोहन चॉकलेट भी इस दुकान का एक स्वादिष्ट आइटम है। बड़ी-बड़ी कम्पनी की चॉकलेटों को भी बच्चे इस मोहन चॉकलेट के सामने नापसंद करते हैं। अशोक खेड़ा ने बताया कि जब 1970 के दौरान उन्होंने कारोबार संभाला उस समय मोहन चॉकलेट 10 रुपये प्रति किलो बिका करती थी आज यह चॉकलेट 500 रुपये प्रति किलो पर बिकती है। मोहन फलूदा और चॉकलेट के जायके को लागों की पहली पसंद बनने के बाद अशोक खेड़ा ने 1989 में समोसे और ब्रेड-पकोड़े के साथ गुलाब जामुन भी बेचना शुरू किया। जिसके बाद बाजार के अधिकतर व्यापारी उनके समोसे के कायल हो गये। गर्मी में लोगों को रबड़ी फलूदा खाने के लिये मोहन की दुकान का ही रुख करते है। हालांकि फलूदा और चॉकलेट के अलावा यहां गाजर और मंूग की दाल का हलवा भी मिलता है। 1950 से अब तक गाजियाबाद के लोगों को फलूदा और चॉकलेट खिलाते आ रहे मोहन वालों की शहर में दूसरी दुकान तुराब नगर के सामने रमतेराम रोड़ पर स्थित है।

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